NIA ने जिन 4 लोगों को आतं’की बताकर 3 साल तक जेल में रखा वो सबूतों के अभाव में बाइज़्ज़त बरी हुए

मस्जिद निर्माण के लिए आ’तंकी फं’डिंग उपयोग करने के एक मामले में सबूतों के आभाव के चलते दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सभी चारों आरोपियों को रिहा कर दिया है. यह मामला तीन साल पुराना है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चार लोगों को गिर’फ्तार करते हुए दावा किया था कि पलवल में बनाई जा रही एक मस्जि’द में टे’रर फं’डिंग का पैसा उपयोग किया जा रहा है और यह पैसा सीधे पाकिस्तान से आ रहा हैं.

जांच एजेंसी ने बताया था कि आतं’की भारत में मस्जिद निर्माण के बहाने अपने स्लीपर से’ल एक्टिव करके गड़ब’ड़ी या खुराफात फ़ैलाने के इरादे में है. एनआईए द्वारा गिर’फ्तार किये गए 4 आरोपियों को कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपमुक्त कर दिया कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं.

घी को बताया वि’स्फो’टक का कोड

अपने तीन साल रोहिणी जे’ल में बिताने के बाद राजस्थान के नागौर निवासी 42 वर्षीय मोहम्मद हुसैन मोलानी जब रिहा होकर बाहर आए तो उनके परिवार वालों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था.

NIA

मोलानी के बड़े भाई तो उसे गले से लगाकर रोने ही लगे. 21 जनवरी 2019 को दुबई से लौट रहे मोलानी को जयपुर एयरपोर्ट से एनआईए ने गि’रफ्तार किया था. एनआईए ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने पलवल में मस्जिद बनाने के लिए आतं’कियों द्वारा दिया गया पैसा उपयोग किया लेकिन अब तीन साल बाद कोर्ट ने उन्हें आरोपों से बरी कर दिया.

इस मामले को लेकर एनआईए ने मोहम्मद हुसैन मोलानी के आलावा मोहम्मद सलमान, मोहम्मद सलीम और आरिफ गुला’म बशीर को भी गिर’फ्तार किया था.

एनआईए ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोर्ट में दावा किया कि मोहम्मद सलमान के मोबाइल से कुछ चैट में ऐसे मैसेज मिले है जिनमें घी और खिदमत जैसे शब्द उपयोग किये गए है.

तीन साल बाद हुए रिहा

एनआईए ने घी का मलतब वि’स्फो’टक बताया जबकि खिदमत का मतलब आ’तं’की ट्रे’निं’ग बताया गया. वहीं अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि इस तरह तो इन शब्दों के कई मीनिंग हैं इसलिए एनआईए द्वारा इनके जो अर्थ निकाले गए है उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इन शब्दों के आधार पर किसी का लिंक टे’रर के साथ नहीं जोड़ा जा सकता. एनआईए इसके आलावा कोई और सबूत पेश करने में नाकामयाब रही है, इसलिए कोर्ट सभी 4 लोगों को आरो’प मुक्त करटी है.

आपको बता दें कि जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया था कि पलवल में मस्जिद निर्माण के लिए पैसा पाकिस्तानी आ’तं’की संगठन फलह ई इंसानियत फाउंडेशन द्वारा दिया जा रहा है. जिस पर कोर्ट ने कहा कि इसके कोई सबूत आपने पेश नहीं किये हैं.

About Preet Bharatiya

Avatar of Preet Bharatiya
प्रीत हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं, पत्रकारिता में M.A की योग्यता रखती हैं, फिलहाल ये यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए बतौर फ्रीलांसर कार्य कर रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.