अफगानिस्तान के तालिबानी शासन में ‘हरे रामा-हरे कृष्णा’, मंदिर का वीडियो वायरल हुआ

तालिबान ने अफगानिस्तान को एक बार फिर से अपने कब्जे में ले लिया है. इससे पहले तालिबान 1991 में भी अफगानिस्तान पर शासन कर चूका है जो काफी क्रू’र और अमानवीय रहा था. वहीं अफगानिस्तान में तालिबानी शासन की वापसी से अफगानिस्तान के आम नागरिकों के बीच ड’र का माहौल बना हुआ है. इसके अलावा अफगान के अल्पसंख्यकों के बीच भ’य और ख’त’रे का माहौल सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है.

तालिबान के इस इस्लामिक शासन से जब वहां के बहुसंख्यकों में चिंता और ड’र है तो आप अल्पसंख्यकों की स्थिति का अंदाजा लगा सकते है. लेकिन इसी बीच अफगानिस्तान से एक वीडियो सामने आया है जो ऐसे हालातों में कुछ हद तक शुकून और राहत देता है.

अफगानिस्तान में भजन करते दिखे अल्पसंख्यक

Navratri in Afghani Mandir

दरअसल काबुल के एक मंदिर में नवरात्रि के दौरान अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लोग भजन पूजन करते नजर आए. इसी भजन का यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जो तेजी से वायरल होने लगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह वीडियो काबुल के पास स्थित असमाई मंदिर का है. वीडियो में हिंदू समुदाय के कुछ श्रद्धालु  हरे रामा-हरे कृष्णा भजन का गायन करते हुए नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस असमाई मंदिर में हिंदुओं ने कीर्तन और जागरण किया था.

इस वीडियो को सोशल मीडिया पर पत्रकार रविंदर सिंह रोबिन ने अपने वेरीफाई टि्वटर हैंडल से शेयर किया है. हरे रामा-हरे कृष्णा गाते हुए हिंदुओं का यह वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि हिंदू समुदाय के कुछ लोगों ने सोमवार की रात काबुल के प्राचीन असमाई मंदिर में नवरात्रि का उत्सव सेलिब्रेट किया.

पत्रकार रविंद्र सिंह रोबिन के अनुसार भारत सरकार से मांग करते हुए इन हिंदुओं ने कहा है कि आर्थिक तंगी और सामाजिक सुरक्षा जैसी मुसीबतों के बीच उनका जीना दुश्वार हो रहा है. इसलिए उन्हें यहां से जल्द से जल्द निकाला जाए.

गौरतलब है कि अगस्त महीने में तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान को अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद से ही अफगानिस्तान पर तालिबानी शासन लागू है और अफगानिस्तान इतिहास की सबसे खराब अर्थव्यवस्था वाले दौर का सामना कर रहा है. यहां तक कि लोगों के पास खाने-पीने तक के लिए पैसे नहीं है.

वही तालिबानी शासन के नियमों और कानूनों से आम जनता के बीच है ड;र का माहौल बना हुआ है. तालिबान ने अपने शासन में शरीयत कानून को लागू किया है.

तालिबान इससे पहले 1991 में भी अफगानिस्तान पर शासन कर चूका. इस दौरान महिलाओं पर कई तरह की पा’बंदी लगाई गई थी. साथ ही क’ड़ी स’जा के सावधान रखे गए थे. जिसके चलते तालिबान के पहले शासन को काफी क्रू’र शासन कहा जाता है.

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प्रीत हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं, पत्रकारिता में M.A की योग्यता रखती हैं, फिलहाल ये यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए बतौर फ्रीलांसर कार्य कर रही हैं।

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