जिस बीजेपी ने बारांबकी में ढहाई थी मस्जिद, अब वहीं बीजेपी मंदिर को लेकर उठा रही यह कदम

ऐसे धार्मिक स्थल जो अवै’ध रूप से निर्मित है, उनके साथ क्या होगा चाहिए? इस सवाल के जवाब में आप बिना क्षण गवाएं कहेंगे कि उन्हें तोड़ देना चाहिए. असल में ऐसे निर्माण न सिर्फ कानून का उल्लंघन करते हैं बल्कि धर्म और कानून को आमने-सामने लाकर खड़ा भी कर देते है. इसी को देखते हुए साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था.

कोर्ट ने कहा था कि सार्वजनिक स्थलों और सड़कों पर मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे जैसे कोई भी धार्मिक स्थल नहीं बनने चाहिए. यकीनन यह आदेश कानून को सर्वोपरि रखता है और यह एक अच्छा फैसला माना गया था.

कर्नाटक में मंदिर गिराने पर विवा’द

लेकिन जब कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को राज्य में लागू करना चाहा तो सत्ता पक्ष और विपक्ष तक धर्मरक्षक बनने की होड़ में कूद पड़े. नतीजा यह हुआ कि अब कर्नाटक सरकार इस आदेश को ख़ारिज करने के लिए कानून बनाने जा रही हैं.

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कर्नाटक सरकार का यह कानून ऐसे अ’वैध धार्मिक स्थलों को गिराए जाने से बचाएगा. पिछले दिनों कर्नाटक में मंदिर को गिराए जाने से बवाल मचा है. मंदिर गिराने पर जमकर राजनीति की जा रही है, कांग्रेस और जेडीएस जैसी विपक्षी पार्टियां सत्ताधारी बीजेपी को हिंदू विरोधी बता रही है.

क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले पर लंबी सुनवाई के बाद 29 सितंबर 2009 को आदेश देते हुए दो बड़ी बातें कही. कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों, पार्कों या किसी अन्य सार्वजनिक स्थल पर बिना इजाजत मंदिर, मस्जिद, चर्ज, गुरुद्वारा आदि के नाम पर कोई नया निर्माण नहीं होगा.

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इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि पहले से बने गैर कानूनी धार्मिक निर्माणों को सभी सरकारें केस टू केस रिव्यू करेंगी और उसके बाद उचित कदम उठाएंगी. वहीं इस फैसले को लेकर वक्फ बोर्ड ने याचिका दायर करके मांग कि उनके स्थलों को ना ढहाया जाए.

जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हम गैरकानूनी मंदिर और मस्जिद के बीच कोई भेद नहीं करते. लेकिन जब कोर्ट का यह फैसला लागू करने का वक्त आया तो मंदिर और मस्जिद के नाम पर खूब भेदभाव हुए. सत्ताधारी पार्टियों ने अपनी सहूलियत के मुताबिक राजनीति की.

अवै’ध मस्जिद गिराने पर अधिकारी का तबादला

आईएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल ने 2013 में गौतम बुद्धनगर में गैरकानूनी तौर पर बनाई गई मस्जिद की दीवार को गिरा दिया. जिस पर खूब हल्ला मचा और तब के सीएम अखिलेश यादव ने दीवार गिराने वाले अधिकारी को निलंबित कर दिया. बाद में उनका तबादला कर दिया था और दीवार भी फिर से बन गई.

ऐसे मामले बाकि राज्यों से भी सामने आते रहे. हाईकोर्ट्स लगातार कहते रहे कि अवैध निर्माण न हो इसका ध्यान रखा जाए लेकिन सरकारों ने कोई खास ध्यान नहीं दिया.

Basavaraj Bommai

इसी मामले को लेकर जब कर्नाटक हाईकोर्ट को लगा कि गैरकानूनी निर्माण ढहाने में सरकार को कोई रूचि नहीं ले रही है तो कोर्ट ने मामले को स्वत संज्ञान लेते हुए 27 जून 2019 को फैसला दिया कि सितंबर 2009 के बाद बने सारे गैरकानूनी निर्माण जल्द से जल्द हटाए जाए.

लेकिन फैसले पर सरकार ने कोई खास ध्यान नहीं दिया. जब कोर्ट बार-बार पूछती रही तब राज्य सरकार ने कार्रवाई शुरू की. प्रशासन ने गैरकानूनी तरीके से बने 6 हजार से ज्यादा धार्मिक स्थलों की पहचान की. इसके बाद तो’ड़ने का काम शुरू किया गया.

अवैध मंदिर तोड़ने पर हंगा;मा

अखबारों की खबरों के अनुसार बड़ी तादात में मंदिर, मस्जिद और चर्चों को भी तो’ड़ा गया. कुछ स्थलों को दूसरी जगह शिफ्ट भी किया गया. लेकिन जब 10 सितंबर को नंजनगुड तालुक में मंदिर टू’टा तो विवा’द शुरू हो गया.

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कांग्रेस और जेडीएस ने मंदिर टूट’ने को हिंदुओं का अपमान करार दिया. जिसके बाद अखिल भारतीय हिंदू महासभा के संगठन नेता धर्मेंद्र ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीएम को ध’मकी दे डाली. उन्होंने कहा कि जो भी हिंदुओं की संस्कृति और सभ्यता के खिलाफ़ जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा.

उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं को दुख पहुंचाया गया तो गांधी भी मा’रे गए. हमने जब गांधी को नहीं बख्शा तो आप कौन हो.

इसके बाद कुछ बीजेपी नेता भी सामने आए. मैसूर से बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा ने कहा कि सिर्फ मंदिरों को तोडा जा रहा है जबकि दूसरे धर्मों के स्थलों को नहीं तोड़ा जा रहा है.

विरो’ध बढ़ता देख बोम्मई सरकार बैकफुट पर आ गई. इसके बाद सरकार विधानसभा में कर्नाटक रिलिजियस स्ट्रक्चर प्रोटेक्शन बिल 2021 लेकर आई. बिल के मुताबिक कोर्ट का आदेश चाहे कुछ भी हो यह कानून लागू होने के दिन से कर्नाटक अपने नियमों के मुताबिक धार्मिक स्थलों का संरक्षण करेगा.

मंदिर और मस्जिद ढहाने में पक्षपात क्यों?

अब बात करते है एक पुराने मामले की. इसी साल 17 मई को यूपी के बाराबंकी में एक मस्जिद को गिराया गया. खूब विरो’ध हुआ लेकिन बीजेपी सरकार ने कहा कि यह गैरकानूनी निर्माण है इसलिए ढहाया गया. इस पर किसी बीजेपी नेता ने विरोध तक नहीं दर्ज कराया.

Barabanki Mosque

इसके बाद दिल्ली की चांदनी चौक वाले मंदिर को ढहाने वाला मामला सामने आया. लेकिन इस बार बीजेपी नेता कपिल मिश्रा आगे आ गए. उन्होंने इस कार्रवाई का जमकर विरो’ध किया. अब आप देखिए एक ही पार्टी का रवैया दिल्ली, यूपी और कर्नाटक तीनों जगह कैसे अलग-अलग दिखता है.

अगर गैरकानूनी निर्माण बता कर मस्जिद को गिराया जा सकता है तो फिर गैर कानूनी मंदिर क्यों नहीं. सेक्युलर वोट्स के नाम पर राजनीति करने वाली पार्टियां भी इसमें बराबर की भागीदार रही है. कोई मस्जिद की दीवार गिरने पर अधिकारी का तबादला कर देता है तो कोई कोर्ट के आदेश के बाद भी मंदिर गिराए जाने पर राजनीति करता हैं.

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