योगी आदित्यनाथ जिस सीट से खड़े हुए वहाँ 45 साल में पहली बार रिकॉर्ड बना, जानिए कैसे

उत्‍तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान हो चुका है और अब 10 मार्च को चुुनावों के नतीजे घोषित किए जाएंगेे. मतगणना के दिन नजर सिर्फ में सरकार किसकी रहेगी सिर्फ इस पर नहीं होगी. बल्कि राज्‍य की हॉट सीटों पर भी हर किसी ही नजर बनी रहेगी. इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे है. सीएम योगी गोरखपुर शहरी सीट से चुनावी मैदान में है.

गोरखपुर में इस बार 53.30% लोगों ने अपने मत का इस्‍तेमाल किया है. 45 साल के इतिहास में ये पहला मौका है जब इतनी ज्यादा वोटिंग हुई है. पिछले चुनाव यानी 2017 के विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार 2.32% की बढ़ोतरी देखने को मिली.

वोटिंग बढ़ी तो जीत का मार्जिन भी बढ़ा

2017 में गोरखपुर शहरी सीट पर 50.98% मतदान हुआ था. मुख्यमंत्री योगी की सीट पर वोटिंग बढ़ने के कई सियासी मायने निकाले जा रहे है, जिन पर खूब चर्चा चल रही है.

yogi adityanath gorakhpur

गोरखपुर की इस सीट पर हम आपको आंकड़ों के जरिए बात करेंगे, इस सीट पर 1977 से अब तक क्या-क्या हुआ? और यहां मतदान घटने और बढ़ने के क्‍या मायने है. चलिए नजर डालते है.

1989 से गोरखपुर शहरी सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है. 2002 में योगी आदित्यनाथ और पार्टी के बीच टिकट बंटवारे को लेकर अनबन हुई तो योगी आदित्यनाथ ने इस सीट से डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के टिकट से चुनाव लड़ाया.

अग्रवाल को जीत हासिल हुई, इसके बाद 2007 से डॉ. राधा मोहन बीजेपी के टिकट से लगातार तीन बार विधायक चुने गए.

अगर इस सीट के पिछले 45 सालों के आंकड़ों हर नजर डाली जाए तो सामने आता है कि जब भी वोटिंग बढ़ी है, इसका सीधा फायदा बीजेपी को ही मिला है. यानि वोटिंग अधिक होने पर बीजेपी की जीत का अंतर भी बढ़ा है.

इस सीट से 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी के उम्‍मीदवार दूसरे नंबर पर रहे जबकि 2017 में इस सीट पर कांग्रेस पार्टी दूसरे नंबर पर रही.

Voting in Gorakhpur

वोटिंग बढ़ाने के क्‍या है मायने

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह कहते है कि वोटिंग में बढ़ोत्‍तरी के दो ही मायने हो सकते हैं. पहला ये कि सरकार या उम्‍मीदवार के खिलाफ नाराजगी और दूसरा उम्‍मीदवार या पार्टी की जोरदार लहर.

उन्‍होंने आगे कहा कि गोरखपुर से सीएम योगी के चुनाव लड़ने की वजह से दूसरा कारण ज्‍यादा प्रभावी लगता है. इसे लेकर वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद श्रीवास्तव ने कहा कि गोरखपुर की पहचान अब योगी आदित्यनाथ से अधिक जुड़ चुकी है. ऐसे में मतदान प्रतिशत बढ़ना योगी के लिए अच्‍छे संकेत के तौर पर देखा जा सकता है.

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प्रीत हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं, पत्रकारिता में M.A की योग्यता रखती हैं, फिलहाल ये यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए बतौर फ्रीलांसर कार्य कर रही हैं।

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