मध्यप्रदेश के गुना ज़िले के कुंभराज का धनिया अमेरिका, लन्दन और जर्मनी तक मशहूर

मध्य प्रदेश: गुना जिले के कुंभराज इलाके का खाने के मसाले में उपयोग में लाया जाने वाला धनिया विदेशों तक एक्सपोर्ट होता है. यहां का जो हरा धनिया है वह विदेशों तक मशहूर है, इसकी वजह है कि एक तो कुंभराज भारत की धनिया की सबसे बड़ी मंडी है. और दूसरी बात यह के यहाँ बिकने के लिए जो धनिया आता है वह विशेष तकनीक द्वारा बनाया जाता है. यानी कि उस हरे धनिया की उच्च क़्वालिटी को पाने के लिए खेत में खड़ी हुई हरे धनिया की फसल की विशेष देखरेख तभी से करनी पड़ती है जब धनिया की फसल 15 दिन की होती है.

Coriander and Green Coriander

गोल दाने वाला छोटा बारीक हरा धनिया का भाव कुंभराज की मंडी में ही लोगों को मिलता है यही खास वजह है कि आसपास के राज्यों तक से किसान सही भाव मिलने की वजह से मध्य प्रदेश के गुना जिले के कुंभराज में ही अपनी धनिया को बेचने पसंद करते हैं. गुना जिले की सीमा से लगा हुआ ही राजस्थान है जहां से भी काफी ज्यादा बड़ी तादाद में राजस्थानी लोग अपनी धनिया की फसल बेचने आते हैं.

देश में हरी धनिया की फसल आने वाला सबसे बड़ा प्रदेश मध्य प्रदेश ही है कुंभराज की मंडी से प्रतिवर्ष लगभग 200 करोड़ रुपए का धनिया विदेशों में जाता है इसके अलावा देश भर में जो मांग है वह भी यहीं से पूरी होती है.

कुम्भराज की मंडी का धनिया अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, साउथ अफ्रीका और जर्मनी जैसे देशों तक एक्सपोर्ट किया जाता है. हमारे देश के सबसे बड़े मसाले वाले ब्रांड MDH, और एवरेस्ट भी कुम्भराज की मंडी का धनिया मंगवाते हैं.

तीन गुना ज़्यादा कीमत में बिकता है ये धनिया, जानिए क्यों

ज़िले में तकरीबन 70 हज़ार हेक्टेयर जमीन पर गुना और आसपास के इलाके में धनिया की खेती की जाती है. जिसमें से लगभग 90% किसान उस विशेष प्रकार के हरे धनिया की खेती नहीं करते जिसका भाव सामान्य धनिया से 3 से लेकर 4 गुना तक ज्यादा होता है.

की फसल का भाव

जैसे कि अगर मान लिया जाए सामान्य धनिया की फसल 8 से ₹10 हज़ार प्रति कुंटल बिकती है तो उस विशेष गुणवत्ता वाले हरे और गोल दाने वाले धनिया की कीमत तकरीबन 25-30 हज़ार रुपए प्रति कुंटल से लेकर 40-45 हज़ार रुपए प्रति कुंटल तक होती है.

छोटे किसान करते हैं एक्सपोर्ट क़्वालिटी की धनिया का उत्पादन

गोल दाने वाली हरी धनिया का उत्पादन अधिकतर छोटे किसान ही करते हैं क्योंकि उसको विशेष देखभाल की जरूरत होती है और बहुत ज्यादा क्षेत्र में बुवाई की गई कुल धनिया की इतने अच्छे तरीके से देखभाल नहीं हो सकती इसका सबसे बड़ा कारण यही है.

धनिया को एक्सपोर्ट क्वालिटी बनाने के लिए जब धनिया की फसल 15 से लेकर 20 दिन की होती है तभी से उसको विशेष देखरेख की जरूरत पड़ती है यहां तक कि जब फसल कट जाती है तो फसल कटने के बाद उसको बिल्कुल भी धूप में खुला नहीं छोड़ा जाता उसको छांव में ही सुखाए जाता है.

Farmers family taking care of coriander crop

ज्यादा क्षेत्र में बुवाई करने वाले बड़े किसान इस वजह से ही एक्सपोर्ट क्वालिटी की धनिया को नहीं होते क्योंकि उसमें बहुत ज्यादा मेहनत का काम होता है. एक्सपोर्ट क्वालिटी की धनिया का उत्पादन करने वाले छोटे छोटे किसान होते हैं जिनकी 12 बियर जमीन से लेकर 5 10 बीघा जमीन होती है.

कैसे होता है विदेशों में एक्सपोर्ट गुना जिले के कुंभराज का धनिया

दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बड़े व्यापारी यहां गुना और कुम्भराज के लोकल व्यापारी से कॉन्ट्रैक्ट पर माल लेते हैं, क्योंकि इनका खुद का व्यापार या यहां के किसानों से सीधा संपर्क तो होता नहीं है. तो वह लोकल व्यापारी की मदद लेकर भरपूर मात्रा में लाखों बोरी धनिया हर साल यहाँ से खरीदते हैं.

मुंबई और कलकत्ता, मद्रास के इन्हीं व्यापारियों द्वारा हमारे देश की बड़ी मसाला कंपनियों की मांग पूरी की जाती है. इसके साथ-साथ यही व्यापारी विदेशों तक भी धनिया को एक्सपोर्ट करने का काम करते हैं.

About भास्कर राणा

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भास्कर वरिष्ठ पत्रकार हैं, पिछले 5 वर्षों से विभिन्न न्यूज़ संस्थानों के लिए बतौर लेखक के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं. फिलहाल यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए एक फ्रीलांसर के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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