आरती डोगरा, जिसे मां-बाप के लिए बोझ समझते थे लोग, वो बनीं आईएएस

Ias Success Story: उत्तराखंड के देहरादून में विजय कॉलोनी में रहने वाले कर्नल राजेंद्र डोगरा और निजी स्कूल में संस्था प्रधान कुमकुम के घर 18 जुलाई 1979 को एक बेटी का जन्म हुआ जिसका नाम आरती डोगरा रखा गया. यह इनकी पहली संतान थी लेकिन इसकी शारीरिक बनावट अन्य बच्चों की तुलना में कुछ अलग थी.

वक्त के साथ आरती की उम्र तो बढ़ती गई लेकिन उनका कद तीन ​फीट 6 इंच पर ही थम गया, इसके बाद उनका कद नहीं बढ़ा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरती डोगरा के जन्म पर डॉक्टर्स ने कहा था कि ये बच्ची एक सामान्य जिंदगी नहीं जी पाएगी.

आईएएस बनने की सफलता की कहानी

2005 में आरती ने पहली बार परीक्षा दी और अपने पहले ही प्रयास में अखिल भारतीय सेवा में राष्ट्रीय स्तर पर 56वीं रैंक हासिल करके आईएएस बनीं.

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लोगों ने भी उनके कद को लेकर खूब ताने सके थे, यहां तक की आरती को परिवार के लिए बोझ तक कहा गया. इतना ही नहीं लोगों ने आरती के माता-पिता को दूसरी संतान पैदा करने की नसीहतें तक दी.

लेकिन उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को ही कामयाब बनाने की ठान ली और इसी निर्णय ने आज आरती डोगरा को आईएएस अफसर बना दिया.

आरती को एक सफल आईएएस अफसर बनाने के लिए उनकी माँ ने अपनी इकलौती बेटी को कभी किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी, और न ही कभी उन्होंने उनकी पढ़ाई को लेकर किसी तरह की रोक टोक लगायी

आरती डोगरा ने काफी हा’र नहीं मानी और अपनी कद-काठी की कमजोरी को ही अपनी ताकत बना ली. आरती ने देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल में दाखिला हासिल किया.

इसके बाद दिल्ली युनिवर्सिटी के टॉप कॉलेज लेडी श्रीराम कॉलेज में दाखिला लेकर इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन कम्प्लीट की, फिर उन्होंने वापस देहरादून पहुंच कर पोस्ट ग्रेजुएशन शुरू की.

इसी दौरान उनकी मुलाकात उत्तराखंड की पहली महिला आईएएस अधिकारी मनीषा पंवार से हुई. मनीषा से मुलाकात के बाद आरती को यूपीएससी की तैयारी करने की प्रेरणा मिली और उन्होंने इसे ही अपना लक्ष्य बनाने की ठान ली.

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आईएएस मनीषा पंवार से मुलाकात के बाद आरती डोगरा की जिंदगी को एक नई दिशा मिल गई. उन्होंने खूब मेहनत के साथ यूपीएससी की तैयारियों शुरू कर दी.

आरती ने राजस्थान कैडर चुना. आईएएस की ट्रेनिंग के बाद वर्ष 2006-2007 में आरती डोगरा को पहली पोस्टिंग उदयपुर में एडीएम के तौर पर मिली.

इसके बाद वो अलवर व अजमेर के ब्यावर में एसडीएम भी बनी. उन्हें वर्ष 2010 में बूंदी में बतौर जिला कलेक्टर नियुक्ति मिली.

कई जिलों में कलेक्टर रहने के बाद वो जोधपुर डिस्कॉम की प्रबंध निदेशक बनी. इसके बाद 19 दिसम्बर 2018 से 31 दिसम्बर 2018 तक मुख्यमंत्री की संयुक्त सचिव पद पर रहीं.

फिर 1 जनवरी 2019 को उन्हें मुख्यमंत्री की विशेष सचिव नियुक्त किया गया. वर्तमान में वो राजस्थान सीएम की विशेष सचिव के तौर पर कार्यरत हैं.

About भास्कर राणा

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भास्कर वरिष्ठ पत्रकार हैं, पिछले 5 वर्षों से विभिन्न न्यूज़ संस्थानों के लिए बतौर लेखक के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं. फिलहाल यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए एक फ्रीलांसर के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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