महंत नरेंद्र गिरी की मुस्लिम समुदाय से की गयी वो अपील, जिसके बाद खुल गई थीं उज्जैन की सभी मस्जिदें

दोस्तों इंसान चला जाता है, पर उसकी अच्छी या बुरी यादें हमेशा लोगों के दिलों में रहती हैं| हाल ही में अखाड़ा परिषद के महंत नरेंद्र गिरि के साथ जिस तरह से हाद’सा हुआ वह लोगों के लिए किसी सद’मे से कम नहीं है| उनके साथ क्या हुआ या क्या नहीं, यह तो जांच का विषय है और जांच पूरी होने के बाद ही सब कुछ सामने आ सकेगा|

लेकिन आज यहां मैं आपको साल 2016 कि वह याद ताज़ा कर रहा हूं, जब उज्जैन के मुस्लिम समुदाय से, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘माननीय शिवराज सिंह’ ने उज्जैन के मुसलमानों से एक अपील की थी जिसके बाद आधी रात के वक्त उज्जैन की तमाम मस्जिदों को सिंहस्त में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था|

Shivraj singh and narendra giri

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उज्जैन में हर 12 साल के बाद सिंहस्त का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं| ऐसे में लाखों लोगों के लिए तमाम तरह की व्यवस्थाएं करना एक बड़ा कठि’न काम हो जाता है|

इसके अलावा एक बात और लोगों को शायद याद न हो, बाबरी मस्जिद के पक्षकार ‘हाशिम अंसारी’ के घर इनका आना जाना था, और महंत जी यदा-कडा हाशिम अंसारी से उनके घर उनसे मिलने- आशीर्वाद लेने पहुंच जाते थे और महंत नरेंद्र गिरी के सिर पर हाथ रख हाशिम अंसारी भी अपनी स्नेह वर्षा कर देते थे

यह हुआ था कि 5 मई 2016 को अचानक तेज बारिश और आंधी ने टेंट में शरण लेने वाले लाखों श्रद्धालुओं को तितर-बितर कर के रख दिया था, और यह एक बड़ी चुनौती थी कि उन्हें उस तेज़ बारिश से बचने के लिए कहीं तो सर छिपाने के लिए छत चाहिए थी|

तब महेंद्र नरेंद्र गिरी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उस दौरान, स्थिति को भांपते हुए जैसा संभव हुआ वैसा लोगों के लिए इंतजाम करवाया| इसके बाद महंत जी ने शिवराज सिंह के साथ आपस में सलाह मशवरा करके उज्जैन के शहर काजी और मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों से भी संपर्क किया|

Humanity at ujjain kumbh

इन लोगों को बुलवाकर जब महंत जी ने उन्हें इस तरह की परेशानी के बारे में बताया | जैसे ही महंत नरेंद्र गिरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘माननीय शिवराज सिंह’ का इस तरह से अनुरोध करना था और और फिर इसके बाद देखते ही देखते शहर काजी और उज्जैन के मुस्लि’म समाज के जिम्मेदार लोगों ने उज्जैन भर में जितनी भी मस्जिद और जमात खाने या मुसाफिर खाने थे उन्हें आधी रात के वक़्त उज्जैन सिंहस्त में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था|

और इतना ही नहीं, श्रद्धालुओं के लिए खाने पीने के इंतज़ाम से लेकर उनके ज़रुरत की चीजें मुहैया करवायीं गयीं| उस दौरान देशभर के लोगों ने हिन्दू-मुस्लिम सद्भावना की एक अलग ही मिसाल देखी थी, और ये सब संभव हो पाया था अखाड़ा परिषद् के सर्वे सर्व महंत नरेंद्र गिरी जी की वजह से|

Ujjain kumbh people rest in moshque

अब आप सोच रहे होंगे कि इस तरह से तो कोई भी कर सकता है| लेकिन आज हमारे बीच वह इंसान नहीं है, लेकिन महंत नरेंद्र गिरी जो सनातन धर्म के रास्ते पर चलने वाले एक संत थे, उनकी इस तरह की विचारधारा दर्शाती है कि वह हिंदू धर्म के अलावा भी अपने मन में सब धर्मों का समभाव विचार रखते थे, तभी तो ऐसे वक्त पर उन्होंने समुदाय विशेष को याद किया और उसके बाद जो हुआ वह देश और विदेश तक एक मिसाल बन गया था|

बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में महंत नरेंद्र गिरी ने देश विदेशों तक अपनी एक अलग ही पहचान बनाई हुयी थी। सालों से देश में शायद ही कोई ऐसी महान हस्ती रही हो या कोई बड़ा राजनेता हो, अधिकारी रहा हो, जो संगम स्नान के लिए आया हो और लेटे हनुमानजी का दर्शन के अलावा वो महंत नरेंद्र गिरी से आशीर्मुवाद लेकर न गया हो|

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