अल्‍लाह हू अकबर का नारा लगाने वाली मुस्‍कान बोली, अगली बार हिंदुस्तान जिंदाबाद बोलूंगी

कर्नाटक: हाल ही में मांड्या प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक छात्रा मुस्कान खान को जब युवाओं के झुंड ने घेर लिया था. इसके बाद वह मुस्कान को देखकर जोर-जोर से जय श्रीराम के नारे लगाने लगे तो उनका पलटवार करते हुए मुस्कान ने भी अपनी तरफ से अल्लाह हू अकबर का नारा लगाया था, इसके बाद हिजाब का विवाद इस लेवल पर पहुँच चुका है के इसका असर अब सोशल मीडिया से लेकर विदेशों तक सुनाई दे रहा है.

Hijab Countroversy in india

अब उसी मुस्कान ने कहा है कि ‘अगर अब कभी ऐसा फिर हुआ तो मैं इस बार हिंदुस्तान जिंदाबाद कहूंगी’, दरअसल जब इस मुस्‍कान की तरफ भी’ड़ उसके सामने की तरफ बढ़ती आ रही थी तो वह दर गयी थी. मुस्कान ने BBC को बात करते हुए बताया था कि जब वह दर जाती है तो अल्‍ल‍ाह हू अकबर कहती है.

क्या हुआ था मांड्या प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में उस दिन?

एक मुस्लि’म लड़की बुर्का पहने हुए अपने कॉलेज में जैसे ही अपनी स्कूटी लेकर दाखिल होती है, उसके पीछे ही सैकड़ों युवकों का झुंड हाथों में भगवा झंडी और गले में भगवा पट्टा डाले हुए लड़की को घेर लेते हैं.

ये सैकड़ों लड़कों का हुजूम लड़की को का घेराव करते हुए जय श्री राम के नारों का उद्घोष करता है, तो इसके बदले में वह लड़की भी जोर से अल्लाह हू अकबर चिल्लाती है. और यह सब उस दौरान कई बार रिपीट होता है.

इतने लड़कों के बीच घिरी हुई वह लड़की एकदम बेखौफ नजर आती है, और उसका यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर आता है, तो देखते ही देखते यह कुछ ही घंटों में यह वीडियो पूरे देश भर में फैल जाता है.

इधर मेनस्ट्रीम मीडिया भी हिन्दू-मुस्लिम एंगल होने के चलते इस मामले को और भी ज़्यादा हवा दे रहा है. बहरहाल दोनों पक्षों के लोग अपनी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया देना चालू हो गए और ट्विटर और फेसबुक जैसे मेजर प्लेटफार्म पर लोगों के बीच यह एक तरह से बहस का विषय बन गया है.

लड़की का घेराव करने वाले अधिकतर बाहरी थे

मीडिया में खबरों के अनुसार लड़की ने बताया है, जब उसके कॉलेज में लड़कों ने उसका घेराव किया तो उसने देखा था कि उसमें से अधिकतर लड़के उस कॉलेज के नहीं थे, वह अधिकतर बाहरी लोग थे.

कॉलेज कैंपस में इतने सारे युवकों का हुजूम किसके कहने पर इकठ्ठा हुआ और इस घट’ना के पीछे किन लोगों का हाथ है क्या इस विषय पर कुछ जांच होगी फिलहाल ये सब सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं.

पढ़ने लिखने वाले बच्चों को राजनीति की रोटियां सीखने वालों ने इनके भविष्य को अंधकार की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि अभी यह विवाद एक जगह से उठा है हो सकता है आने वाले समय में यह कहीं और भी देखने को मिले.

पढ़ाई करने वाले बच्चों के माता-पिता का चिंतित होना लाजमी है, चाहे वह किसी भी समुदाय से आते हों. एक अच्छा इंसान कभी नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे पर किसी भी तरह के भेदभाव की परछाई पड़े.

About भास्कर राणा

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भास्कर वरिष्ठ पत्रकार हैं, पिछले 5 वर्षों से विभिन्न न्यूज़ संस्थानों के लिए बतौर लेखक के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं. फिलहाल यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए एक फ्रीलांसर के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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