न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने किसानों के खिलाफ फ़र्ज़ी रिपोर्टिंग के मामले में ज़ी न्यूज़ चैनल को लगाई फटकार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में अपने तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की है. इसके साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही किसान आंदोलन ख’त्म हो सकता हैं. किसान आंदोलन की शुरुआत 26 नवंबर 2020 को हुई और कुछ ही दिनों में यह अपना एक साल पूरा करने वाला हैं. बीते साल भर के दौरान उन किसान संगठनों की छवि ख़राब करने के प्रयास किये गए जो मोदी सरकार के विवा’दास्प’द कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.

मीडिया के एक बड़े हिस्से इसमें पूरा सहयोग दिया. सरकार समर्थक कहे जाने वाले कई न्यूज़ चैनलों ने खुलकर किसान आंदोलन का विरो’ध करते हुए उनके खिलाफ फर्जी खबरें चलाई.

NBDSA ने लगाई ज़ी न्यूज़ को फ’टकार

इसी को लेकर न्यूज ब्रॉडकास्टिंग डिजिटल स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने न्यूज़ चैनल जी न्यूज़ को फ’टकार लगाई है. इसके साथ ही जी न्यूज़ से किसान आंदोलन से जुड़े अपने दो वीडियोज को तत्काल वापस लेने के लिए भी कहा गया है. यह वीडियो 19 और 20 जनवरी को पब्लिश किये गए थे.

Zee news sudhir

अपने फैसले में एनबीडीएसए ने कहा कि धार्मिक रिपोर्टिंग के दौरान टीवी चैनलों को सावधानी बरतनी चाहिए. न्यूज़ चैनल ज़ी न्यूज़ ने लाल किले से भारतीय झंडे को हटा’ने को गलत वीडियो प्रसारित किया था.

जी न्यूज़ ने किसान आंदोलन से संबंधित फर्जी खबरें चलाई. इसके आलावा चैनल ने हेड लाइन कोड ऑफ एथिक्स और ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड का भी सीधे तौर पर उल्लंघन किया है.

वहीं एनबीडीएसए के इस आदेश के बाद पत्रकार अजीत अंजुम ने भी न्यूज़ चैनल जी न्यूज़ और बीजेपी पर निशाना साधा है. अजीत ने जी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी को निशाने पर लेते हुए अपने ट्वीट में लिखा कि ये एक एसा चोर है जिसकी हर रोज चोरी पकड़ी जाती हैं लेकिन फिर भी यह सीनाजोरी करता हैं. जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का.

अजीत अंजुम ने साधा निशा’ना

पत्रकार ने आगे लिखा कि चौधरी का चैनल रात-दिन मोदी सरकार की चापलूसी करता रहते है और किसान वि’रोधी एजेंडा चला रहा था. चैनलों की संस्था ने भी इस बात को माना है कि चौधरी का चैनल लगातार फर्जी खबरें चला रहा हैं.

दरअसल एक शिकायत दर्ज कराई गई थी न्यूज़ चैनल जी न्यूज़ के खिलाफ, इसमें कहा गया था कि चैनल ने ट्रैक्टर के वीडियो को इकट्ठा कर उसमें कई बदलाव किये और इसके बाद उसे पब्लिश कर दिया गया, चैनल ने इस वीडियो को सोशल मीडिया के जरिए खूब वायरल किया.

इसमें न्यूज़ एंकर ने दावा करते हुए कहा था कि यह ट्रैक्टर्ज आंदोलन कर रहे किसानों के हैं. जिन्हें 26 जनवरी की रैली में इस्तेमाल किया गया था. जी न्यूज़ की इस खबर के बाद ही किसानों को आ’तंकवा’दी कहा गया था.

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