यमुना में झाग वाली तस्वीरें तो आपने देखी ही हैं, जाने वैज्ञानिक कारण- आखिर इतना झाग किस वजह से है?

यमुना नदी का जल पहले से भी ज्यादा दूषित हो गया है. यमुना नदी का पानी तेजी से दूषित और गंदा हो रहा है, विगत कुछ सालों में इसमें काफी तेजी आई है. हाल ही में छठ पूजा के चलते यमुना नदी की सफाई का मुद्दा उठता नजर आया. दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी आप ने इसके लिए केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को जिम्मेदार बताया है. जबकि बीजेपी सांसद मनोज तिवारी घाटों से सीधा प्रसारण करके केजरीवाल सरकार पर यमुना के इस हाल का आरोप ग’ढ़ रहे है. इस बीच यह जानने का प्रयास करते है कि आखिर यमुना नदी का यह हाल हुआ कैसे?

छठ पूजा के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें देखने को मिली जहां भक्त कमर के जितने जहरीले झाग में खड़े हुए नजर आए. दिल्ली से होकर जाने वाली यमुना एक मात्र नदी है, यही दिल्ली के लोगों की पानी की मांग को पूरी करती है. दिल्ली यमुना को सबसे ज्यादा करीब 80% तक दूषित करती है.

यमुना नदी में क्यों बनता हैं झाग?

पानी की सतह पर प्राकृतिक परिस्थितियों में झाग का बनना आम है, यह स्थिति कई झीलों और धाराओं में देखने को मिलती है. कार्बनिक पदार्थ के विघ’टित होने पर फोम के बुलबुले पैदा हो जाते है. वसा के अणु पौधों के मृ’त और सड़ने वाले हिस्सों में होते हैं जो पानी में नहीं घुलते है.

yamuna pollution

ये पानी से हल्के होते है जिसके चलते सतह पर तैरते रहते हैं और फिर धीरे-धीरे जमा होकर सतह पर एक अदृश्य तैरती हुई परत बन जाती है. कार्बनिक पदार्थों से बना झाग नदियों और झीलों में लंबे समय तक रहता है.

वैज्ञानिकों के अनुसार यमुना नदी में फॉस्फेट के उच्च स्तर के चलते झाग बनता है. दिल्ली, यूपी, हरियाणा से अनुपचारित सीवेज में फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट नदी में झाग का कारण है. कई डिटर्जेंट में फॉस्फेट का इस्तेमाल किया जाता है, यह वो यौगिक है जो सफाई को बहुत आसान बना देते है.

toxic foam

यमुना में नहाना खत’रना’क

लेकिन यमुना नदी में फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट 1% रहता है जबकि 99% हवा और पानी होते हैं. जब पानी लहरों, प्राकृतिक झरनों या नदी बैराजों से कृत्रिम तौर से गिराया जाता है तो उसमे वसा की एक परत झाग में बदल जाती है.

यमुना नदी में इस झाग का आपके शरीर के संपर्क में आने से त्वचा में जलन और एलर्जी पैदा कर सकता है. अगर इस पानी को पिया जाए तो रसायन गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और टाइफाइड जैसी बीमारियों हो सकती है.

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