बुर्का पहनी अकेली लड़की को घेर लगाए जय श्रीराम के नारे, देशभर का मुस्लिम समाज ख़फ़ा

यूसी न्यूज़: बेंगरुलु: कर्नाटक हिजाब विवाद- कर्नाटक में स्कूल और कॉलेज में पड़ने वाली छात्राओं के हिजाब पहनने को लेकर विवाद काफी ज्यादा आगे बढ़ चुका है. पिछले कई दिनों से यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा जो भी था जैसे भी था वह चल रहा था. लेकिन आज इस दौरान एक ऐसी घट’ना हो चुकी है जिससे देशभर का मुस्लि’म समुदाय इस घट’ना की वजह से काफी आह’त है. हिजाब का विवाद इस लेवल पर पहुँच चुका है के इसका असर अब सोशल मीडिया से लेकर विदेशों तक से जा पहुंचा है.

Karnataka Hijab Vivad

इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है .और जिस तरह से ये एक लड़की का वीडियो आज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसके बाद तो यह कहना और भी मुश्किल है कि यह यह विवाद अभी जल्द खत्म होने वाला है.

लड़की बेखौफ और आक्रामक पलटवार करती नज़र आयी

एक मुस्लि’म लड़की बुर्का पहने हुए अपने कॉलेज में जैसे ही अपनी स्कूटी लेकर दाखिल होती है, उसके पीछे ही सैकड़ों युवकों का झुंड हाथों में भगवा झंडी और गले में भगवा पट्टा डाले हुए लड़की को घेर लेते हैं.

ये सैकड़ों लड़कों का हुजूम लड़की को का घेराव करते हुए जय श्री राम के नारों का उद्घोष करता है, तो इसके बदले में वह लड़की भी जोर से अल्लाह हू अकबर चिल्लाती है. और यह सब उस दौरान कई बार रिपीट होता है.

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इतने लड़कों के बीच घिरी हुई वह लड़की एकदम बेखौफ नजर आती है, और उसका यह वीडियो जब सोशल मीडिया पर आता है, तो देखते ही देखते यह कुछ ही घंटों में यह वीडियो पूरे देश भर में फैल जाता है.

इधर मेनस्ट्रीम मीडिया भी हिन्दू-मुस्लिम एंगल होने के चलते इस मामले को और भी ज़्यादा हवा दे रहा है. बहरहाल दोनों पक्षों के लोग अपनी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया देना चालू हो गए और ट्विटर और फेसबुक जैसे मेजर प्लेटफार्म पर लोगों के बीच यह एक तरह से बहस का विषय बन गया है.

लड़की का घेराव करने वाले अधिकतर बाहरी थे

मीडिया में खबरों के अनुसार लड़की ने बताया है, जब उसके कॉलेज में लड़कों ने उसका घेराव किया तो उसने देखा था कि उसमें से अधिकतर लड़के उस कॉलेज के नहीं थे, वह अधिकतर बाहरी लोग थे.

कॉलेज कैंपस में इतने सारे युवकों का हुजूम किसके कहने पर इकठ्ठा हुआ और इस घट’ना के पीछे किन लोगों का हाथ है क्या इस विषय पर कुछ जांच होगी फिलहाल ये सब सवाल लोगों के मन में उठ रहे हैं.

पढ़ने लिखने वाले बच्चों को राजनीति की रोटियां सीखने वालों ने इनके भविष्य को अंधकार की ओर धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि अभी यह विवाद एक जगह से उठा है हो सकता है आने वाले समय में यह कहीं और भी देखने को मिले.

पढ़ाई करने वाले बच्चों के माता-पिता का चिंतित होना लाजमी है, चाहे वह किसी भी समुदाय से आते हों. एक अच्छा इंसान कभी नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे पर किसी भी तरह के भेदभाव की परछाई पड़े.

About भास्कर राणा

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भास्कर वरिष्ठ पत्रकार हैं, पिछले 5 वर्षों से विभिन्न न्यूज़ संस्थानों के लिए बतौर लेखक के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं. फिलहाल यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए एक फ्रीलांसर के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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