भड़का’ऊ प्रोग्राम चलाकर लोगों के बीच में सांप्रदा’यिक’ता का जह’र फैलाने वाला इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को सुप्रीम कोर्ट से फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को न्यूज़ चैनल सुदर्शन न्यूज़ के मुस्लिम समु’दा’य के लोगों द्वारा यूपीएससी परीक्षा पास करने से जुड़े एक विवा’दस्प’द क्रार्यक्रम के प्रसा’रण पर रोक लगाते हुए तीखी टि’प्प’णि’यां की है. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ इंदु मल्होत्रा ​​और केएम जोसेफ की बेंच ने सुरेश चव्हाण के इस विवा’दा’स्प’द श्रृंख’ला के शेष एपिसो’ड के प्रसारण को रोक दिया है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रानिक मीडिया पर कई सवाल खड़े किये है.

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रानिक मीडिया के रेगुलेशन की जरूरत महसूस की है क्योंकि आज अधिकांश चैनल सिर्फ टीआरपी की दौ’ड़ में लगे हैं. जिसके चलते मीडिया तेजी से सनस’नी खे’ज की ओर जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता का ह’वा’ला देते हुए कोर्ट से कहा कि मीडिया को नियंत्रित करना किसी भी लोकतंत्र के लिये घा’त’क होगा.

suresh chavhanke

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्याय मू’र्ति चंद्रचू’ड़ ने मीडिया टीवी चैनलों जैसे कि अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी और अन्य के लिए प्रसारण के नए मानक तैयार करने की सलाह दी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट पांच सदस्यीय एक कमेटी गठित करने के पक्ष में है जो भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए कुछ निश्चित मानक तय करेगी. कोर्ट ने प्रस्ता’व दिया कि मीडिया की भूमिका पर विचार करके सुझाव देने के लिए एक 5 सदस्यीय कमेटी बनाई जाए जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या हाई कोर्ट के किसी पूर्व चीफ जस्टिस द्वारा की जाए.

लाइवलाव वेबसा’इट के मुताबिक न्यायमूर्ति चंद्र’चू’ड़ ने आदेश को अमल में लाने के लिए शीर्ष कोर्ट पांच प्रतिष्ठित नागरिकों की एक समिति नियुक्त करने पर विचार कर रहा है जो इले’क्ट्रॉ’नि’क मीडिया के लिए कुछ मानक तय करेगी. कोर्ट की यह टिप्पणी मीडिया के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखी जा रही है.

बार और बेंच की वेबसाइट के अनुसार इस दौरान बेंच ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित कमेटी में हम राजनीतिक रूप से विभा’जनका’री प्रकृति के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं करना चाहते है, हमें ऐसे सदस्यों का चुनाव करना होगा जो प्रशंस’नी’य कद के है और समाज में उनकी छ’वि साफ है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया की स्वतंत्रा को निरं’कु’श नहीं किया जा सकता है लेकिन इसके लिए कुछ नियम बनाए जाने अब बहुत जरुरी हो गए है. कोर्ट ने सख्त  टि’प्प’णी करते हुए कहा की किसी विदे’शी संगठन की कथित सा’ज़ि’श को लेकर खबरें चलाना एक अलग बात होती है लेकिन एक पुरे के पुरे समुदाय को सा’जि’श में शामिल बताना बिल्कुल सही नहीं है.

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