UP सरकार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश, वापस करें CAA प्रदर्शनकारियों से वसूला गया पैसा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को आदेश दिया गया है कि वह CAA प्रोटेस्ट के दौरान हुई सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के तहत शासन ने जो भी पैसा लोगों से नोटिस के ज़रिये वसूला है वह सारा पैसा उन्हें वापस करना होगा. इस तरह का आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया है.

अब से ठीक 7 दिन पहले भी इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया था कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के वसूली नोटिस को रद्द करें वरना उन्हें हमें रद्द करना पड़ेगा.

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आज 18 फरवरी को इस मामले पर सुनवाई की तारिख थी, और इसके तहत सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने CAA प्रदर्शनकारियों को भेजे गए वसूली नोटिस वापस लेने का आदेश दे दिया है.

सुप्रीम कोर्ट का UP सरकार को आदेश, वापस करें रिकवरी के तहत वसूला पैसा

NDTV और आज तक की खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के सभी आदेशों का पालन किया जाएगा और जिला प्रशासन द्वारा CAA में शामिल प्रदर्शनकारियों को भेजे गए नोटिस को वापिस लेने के आदेश दे दिए हैं.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता गरिमा प्रसाद ने अनुसार राज्य में 833 दं’गाइ’यों के खिलाफ कुल 106 FIR दर्ज की गईं थीं, जिनमें से कुछ के खिलाफ लगभग 274 लोगों से राशि वसूली हेतु नोटिस जारी किए गए थे.

इन सभी 274 नोटिसों में से अब तक, 236 नोटिस में वसूली करने के आदेश पारित किए गए थे, जबकि 38 ऐसे मामले थे जो इन्होने किसी वजह से बंद कर दिए थे. CAA विरोध प्रदर्शन के दौरान 451 पुलिसकर्मी भी घा’यल हुए थे जिसके समानांतर आ’पराधिक कार्यवाही और पैसा वसूली की कार्यवाही इन लोगों पर की गई.

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में 236 नोटिस जारी करना कोई बड़ी बात नहीं है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि हम बताएंगे कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का किस तरह से पालन करना चाहिए. जब न्यायपालिका द्वारा पहले ही निर्देश जारी कर दिए थे की इसका फैसला न्यायिक अधिकारी द्वारा किया जाना है तो फिर एसडीएम लोगों पर किस तरह से कार्यवाही कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले में कहा कि जब नोटिस वापस ले लिए गए हैं तो जो तय प्रक्रिया थी उसी के अनुसार पालन होना चाहिए था. यदि कुर्की कानून के विरुद्ध की गई है और आदेश वापस ले लिया गया तो इसके बाद भी कुर्की को कैसे चलने दिया जा सकता है?

About भास्कर राणा

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भास्कर वरिष्ठ पत्रकार हैं, पिछले 5 वर्षों से विभिन्न न्यूज़ संस्थानों के लिए बतौर लेखक के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं. फिलहाल यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए एक फ्रीलांसर के रूप में कार्य कर रहे हैं.

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