रूस के खिलाफ सयुक्त राष्ट्र में पेश हुआ प्रस्ताव, भारत ने मतदान को लेकर कहीं ये बड़ी बात

रूस और यूक्रेन के बीच व्याप्त अशांति को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने आपात बैठक बुलाई है. यूएनएससी ने बैठक के दौरान इस मामले पर निंदा प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को रूस के खिलाफ 11 वोट पड़े जबकि भारत और चीन समेत तीन देशों से मतदान से दूरी बनाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में मतदान में करीब दो घंटे की देरी हुई.

इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका और अल्बानिया ने पेश किया था. इस प्रस्ताव पर मतदान को लेकर कई देश संकोच में नजर आए. ऐसे में प्रस्ताव के सह-प्रायोजक अमेरिका और अल्बानिया ने इस पर समर्थन जुटाने के लिए इस पर हिचकिचाने वाले देशों को एकसाथ लाने की कवायद की.

सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ प्रस्ताव

वहीं इस प्रस्ताव पर चीन ने अपने सहयोगी देश के पक्ष में वीटो का प्रयोग करने की बजाय इससे दूरी बनाने का फैसला लिया. चीन के इस फैसले को कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है.

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15 सदस्यों वाले सुरक्षा परिषद में यह प्रस्ताव शुक्रवार दोपहर (वहां के समयानुसार) को पेश किया गया. जिसके बाद इस मसौदा प्रस्ताव पर मतदान हुआ.

आपको बता दें कि इस प्रस्ताव पर ऑस्ट्रेलिया, एस्टोनिया, जर्मनी, फिनलैंड, जॉर्जिया, इटली समेत सहित संयुक्त राष्ट्र के 67 सदस्य देशों के एक ‘‘क्रॉस रीजनल’’ ग्रुप सह प्रस्ताव रहे.

इस प्रस्ताव के पक्ष में कुछ 11 देश रहे. फ्रांस, अल्बानिया, ब्राजील, गाबोन, घाना, केन्या, आयरलैंड, मैक्सिको, नार्वे, ब्रिटेन और अमेरिका ने इस निंदा प्रस्ताव के पक्ष में और रूस के खिलाफ वोटिंग की.

जबकि मतदान के दौरान इस प्रस्ताव पर भारत,चीन और संयुक्त अरब अमीरात ने वोटिंग से दूरी बनाई. दरअसल अमेरिका की तरफ से पेश इस प्रस्ताव में रूस के आक्रामक बर्ताव की निंदा की गई थी. इसके साथ ही अपनी सेना को यूक्रेन से ‘तत्काल और बिना शर्त’ बालने की मांग उठाई गई थी.

लेकिन यह प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पारित नहीं हो सका, दरअसल इसका कारण यह रहा कि परिषद के स्थाई मेंबर रूस ने इस पर वीटो पॉवर का इस्तेमाल किया.

भारत ने प्रस्ताव को लेकर कहीं ये बात

इस प्रस्ताव का विफल होना तय था और यह यूएस और उसके समर्थक भी जानते थे. लेकिन अमेरिका की दलील दी कि इस पर मतदान से रूस अंतरराष्ट्रीय तौर पर अलग-थलग पड़ेगा.

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वहीं सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव के विफल होने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसे ही प्रस्ताव पर जल्द वोटिंग की मांग समर्थक देशों द्वारा की गई है. हालांकि यह मतदान कब होगा यह अभी तय नहीं हुआ है.

आपको बता दें कि महासभा में 193 देश सदस्य है और यहां वीटो का प्रावधान नहीं हैं. वहीं इस प्रस्ताव पर भारत ने कहा कि बातचीत ही मतभेदों पर दूर करने का एकमात्र रास्ता है.

भारत ने खेद जाहिर करते हुए कहा कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने प्रस्ताव पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत यूक्रेन में हो रहे घटनाक्रम से बेहद विचलित है और हम अपील करते है कि सभी कोशिशें हिं’सा को तत्काल रोकने की दिशा में हो.

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प्रीत हिंदी न्यूज़ कंटेंट राइटर हैं, पत्रकारिता में M.A की योग्यता रखती हैं, फिलहाल ये यूसी न्यूज़ हिंदी के लिए बतौर फ्रीलांसर कार्य कर रही हैं।

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